दीवानों से ये मत पूछो
दीवानों पे क्या गुज़री है, गुज़री है
दीवानों पे क्या गुज़री है, गुज़री है
हाँ उनके दिलों से ये पूछो,
अरमानों पे क्या गुज़री है, गुज़री है !
दीवानों से ये मत पूछो !
औरों को पिलाते रहते हैं
और ख़ुद प्यासे रह जाते हैं
और ख़ुद प्यासे रह जाते हैं
औरों को पिलाते रहते हैं
और ख़ुद प्यासे रह जाते हैं
और ख़ुद प्यासे रह जाते हैं
ये पीने वाले क्या जाने ,, मेहमानों
पे क्या गुज़री है, गुज़री है !
दीवानों से ये मत पूछो !
मालिक ने बनाया इनसाँ को
इनसान मुहब्बत कर बैठा
इनसान मुहब्बत कर बैठा
मालिक ने बनाया इनसाँ को
इनसान मुहब्बत कर बैठा
इनसान मुहब्बत कर बैठा
वो ऊपर बैठा क्या जाने , इनसानों पे क्या गुज़री है , गुज़री है
हाँ उनके दिलों से ये पूछो
अरमानों पे क्या गुज़री है , गुज़री है !
हाँ उनके दिलों से ये पूछो
अरमानों पे क्या गुज़री है , गुज़री है !
दीवानों से ये मत पूछो ............. !
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