चाँद सी महबूबा हो मेरी, कब ऐसा मैंने सोचा था
हाँ तुम बिलकुल वैसी हो, जैसा मैंने सोचा था
चाँद सी महबूबा हो मेर, कब ऐसा मैंने सोचा था
हाँ तुम बिलकुल वैसी ह, जैसा मैंने सोचा था
ना कसमें हैं ना रस्में हैं, ना शिकवे हैं ना वादें है – ( २ )
एक सूरत भोली भली है, दो नैनां सीधे सादे हैं
दो नैनां सीधे सादे हैं
एक सूरत भोली भली है, दो नैनां सीधे सादे हैं
दो नैनां सीधे सादे हैं
ऐसा ही रूप ख्यालों में था, जैसा मैंने सोचा था
हाँ तुम बिलकुल वैसी हो, जैसा मैंने सोचा था ..............
मेरी खुशियाँ ही ना बांटे, मेरे ग़म भी सहना चाहे
मेरी खुशियाँ ही ना बांटे, मेरे ग़म भी सहना चाहे
मेरी खुशियाँ ही ना बांटे, मेरे ग़म भी सहना चाहे
देखे ना ख्वाब वो महलों के, मेरे दिल में रहना चाहे
मेरे दिल में रहना चाहे
इस दुनिया में कौन था ऐसा , जैसा मैंने सोचा था
हाँ तुम बिलकुल वैसी हो, जैसा मैंने सोचा था
चाँद सी महबूबा हो मेरी, कब ऐसा मैंने सोचा था
हाँ तुम बिलकुल वैसी हो, जैसा मैंने सोचा था
हाँ तुम बिलकुल वैसी ह, जैसा मैंने सोचा था ..............

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