Tuesday, 7 July 2015

ना कोई है, ना कोई था, ज़िन्दगी में तुम्हारे सिवा तुम देना साथ मेरा, ओ, हमनवा



जब कोई बात बिगड़ जाए, जब कोई मुश्किल पड़ जाए
तुम देना साथ मेरा,

 ओ, हमनवा ) – २

ना कोई है, ना कोई था, ज़िन्दगी में तुम्हारे सिवा
तुम देना साथ मेरा, ओ, हमनवा – २

 हो चाँदनी जब तक रात, देता है हर कोई साथ
तुम मगर अन्धेरों में, ना छोड़ना मेरा हाथ  – २

जब कोई बात बिगड़ जाए, जब कोई मुश्किल पड़ जाए
तुम देना साथ मेरा, ओ, हमनवा

ना कोई है, ना कोई था, ज़िन्दगी में तुम्हारे सिवा
तुम देना साथ मेरा, ओ, हमनवा !

वफ़ादारी की वो रस्में, निभाएँगे हम तो कसमें
एक भी साँस ज़िन्दगी की, जब तक हो अपने बस में – २

जब कोई बात बिगड़ जाए, जब कोई मुश्किल पड़ जाए
तुम देना साथ मेरा, ओ, हमनवा

ना कोई है, ना कोई था, ज़िन्दगी में तुम्हारे सिवा
तुम देना साथ मेरा, ओ, हमनवा !

दिल को मेरे हुआ यकीं, हम पहले भी मिले कहीं
सिलसिला ये सदियों का, कोई आज की बात नहीं  – २

( जब कोई बात बिगड़ जाए, जब कोई मुश्किल पड़ जाए
तुम देना साथ मेरा, ओ, हमनवा ) – २

ना कोई है, ना कोई था, ज़िन्दगी में तुम्हारे सिवा
तुम देना साथ मेरा, ओ, हमनवा – २








someone who is singing with you ....  4 YOU  !

No comments:

Post a Comment