Wednesday, 19 August 2015

Woh chhoti si raatein , woh lambi kahaani !

 Yeh daulat bhi le lo , yeh shohrat bhi le lo
 Bhale chhin lo , mujhase , meri jawaani

Magar mujhako lauta Do
Bachpan ka Saawan !

Woh kaagaz ki kashti ,  
Woh baarish ka paani  ! 

 Woh kaagaz ki kashti ,  
 Woh baarish ka paani (2)


 Muhalle ki sabse , nishaani puraani
 Woh budhiya ,  jise bachche kehate the naani

 Woh naani ki baaton mein , pariyon ka dera
 Woh chehare ki jhurriyon mein ,  sadiyon ka pera

 Bhulaaye nahi bhul sakata hai koy !

 Woh chhoti si raatein , woh lambi kahaani 
                                       
 Woh kaagaz ki kashti ,  woh baarish ka paani  - (2)


 Kadi dhup mein , apane ghar se nikalana
 Woh chidiya woh bulbul , woh titali pakdana

 Woh budhiya shaadi pe ,  ladada jhagadana
 Woh jhulon se girana, woh gir ke sambhalana

 Woh pital ke jharno ke pyaare se tope

 Woh tuti huyi chudiyon ,     ki nishaani
                                           Woh kaagaz ki kashti ,  woh baarish ka paani - (2)

 Kabhi ret ke unchi tilon pe jaana
 Gharonde banaana ,. banaake mitaana

 Woh maasun , chaahat ki tasbeer apani
 Woh khaabon khailauno ki jaagir apani
 Na duniya ka ghum tha , na rishton ke bandhan ,

  Badi khubsurat thi jindgaani

 Yeh daulat bhi le lo, yeh shohrat bhi le lo , Bhale chhin lo mujhase meri jawaani
 Magar mujhako lauta do bachpan ka saawan

Woh kaagaz ki kashti woh baarish ka paani ........... !




Tuesday, 18 August 2015

चुप रहना ये अफ़साना, कोई इनको न बतलाना , इन्हें देखकर, जी रहे हैं सभी !















ये रेशमी ज़ुल्फ़ें, ये शरबती आँखें , इन्हें देखकर, जी रहे हैं सभी
इन्हें देखकर, जी रहे हैं सभी !



ये रेशमी ज़ुल्फ़ें, ये शरबती आँखें , इन्हें देखकर, जी रहे हैं सभी
इन्हें देखकर, जी रहे हैं सभी  !



जो ये, आँखे शरम से, झुक जाएंगी
सारी, बातें यहीं बस रुक जाएंगी !


चुप रहना ये अफ़साना, कोई इनको बतलाना
कि इन्हें देखकर पि रहे हैं सभी , इन्हें देखकर पि रहे हैं सभी !




ये रेशमी ज़ुल्फ़ें, ये शरबती आँखें , इन्हें देखकर, जी रहे हैं सभी
इन्हें देखकर, जी रहे हैं सभी



ज़ुल्फ़ें, मग़रूर इतनी, हो जाएंगी ,
दिल को तड़पाएंगी, जी को तरसाएंगी !



ये कर देंगी दीवाना, कोई इनको बतलाना ,कि इन्हें देखकर, जी रहे हैं सभी



इन्हें देखकर, जी रहे हैं सभी !




ये रेशमी ज़ुल्फ़ें, ये शरबती आँखें इन्हें देखकर, जी रहे हैं सभी
इन्हें देखकर, जी रहे हैं सभी !



Monday, 3 August 2015

इन भूल भुलैय्या गलियों में , अपना भी कोई एक घर होगा !



दो दीवाने शहर में, रात में या दोपहर में  , 


आबोदाना ढूँढते है, एक आशियाना  ढूँढते हैं

आबोदाना ढूँढते है, एक आशियाना ढूँढते हैं

दो दीवाने शहर में, , रात में या दोपहर में

आबोदाना ढूँढते है, , एक आशियाना ढूँढते हैं

दो
 दीवाने .............................................................


इन  भूल भुलैय्या लियों में , अपना भी कोई एक घर होगा

अंबर पे खुलेगी खिड़की या , खिड़की पे खुला अंबर होगा


असमानी रंग की आखों में, ,अस्मानी या आसमानी ?

असमानी रंग की आखों में, , बसने का बहाना ढूँढते हैं


ढूँढते हैं !

आबोदाना ढूँढते है, , एक आशियाना ढूँढते हैं

दो दीवाने शहर में, , रात में या दोपहर में


आबोदाना ढूँढते है, , एक आशियाना ढूँढते हैं


दो दीवाने ........................................................................



जब तारे जमीन पर ... , तारे और ज़मीन पे  ?    ........... of course !



जब तारे जमीन पर जलते हैं, , आकाश जमीन हो जाता है


उस रात नहीं फ़िर घर जाता, , वो चाँद यहीं सो जाता है

जब
 तारे जमीन पर जलते हैं, ,आकाश जमीन हो जाता है


उस रात नहीं फ़िर घर जाता, , वो चाँद यहीं सो जाता है


पल भर के लिए ... , पल भर के लिए ...

पल भर के लिए इन आखों में, , हम एक ज़माना ढूँढते हैं


ढूँढते हैं  , आबोदाना ढूँढते  है, , एक आशियाना ढूँढते  हैं

दो दीवाने शहर में, , रात में या दोपहर में

आबोदाना ढूँढते है, , एक आशियाना ढूँढते हैं

दो दीवाने ... ( 3  ) .. ............................हो दो दीवाने       ||