Monday, 3 August 2015

इन भूल भुलैय्या गलियों में , अपना भी कोई एक घर होगा !



दो दीवाने शहर में, रात में या दोपहर में  , 


आबोदाना ढूँढते है, एक आशियाना  ढूँढते हैं

आबोदाना ढूँढते है, एक आशियाना ढूँढते हैं

दो दीवाने शहर में, , रात में या दोपहर में

आबोदाना ढूँढते है, , एक आशियाना ढूँढते हैं

दो
 दीवाने .............................................................


इन  भूल भुलैय्या लियों में , अपना भी कोई एक घर होगा

अंबर पे खुलेगी खिड़की या , खिड़की पे खुला अंबर होगा


असमानी रंग की आखों में, ,अस्मानी या आसमानी ?

असमानी रंग की आखों में, , बसने का बहाना ढूँढते हैं


ढूँढते हैं !

आबोदाना ढूँढते है, , एक आशियाना ढूँढते हैं

दो दीवाने शहर में, , रात में या दोपहर में


आबोदाना ढूँढते है, , एक आशियाना ढूँढते हैं


दो दीवाने ........................................................................



जब तारे जमीन पर ... , तारे और ज़मीन पे  ?    ........... of course !



जब तारे जमीन पर जलते हैं, , आकाश जमीन हो जाता है


उस रात नहीं फ़िर घर जाता, , वो चाँद यहीं सो जाता है

जब
 तारे जमीन पर जलते हैं, ,आकाश जमीन हो जाता है


उस रात नहीं फ़िर घर जाता, , वो चाँद यहीं सो जाता है


पल भर के लिए ... , पल भर के लिए ...

पल भर के लिए इन आखों में, , हम एक ज़माना ढूँढते हैं


ढूँढते हैं  , आबोदाना ढूँढते  है, , एक आशियाना ढूँढते  हैं

दो दीवाने शहर में, , रात में या दोपहर में

आबोदाना ढूँढते है, , एक आशियाना ढूँढते हैं

दो दीवाने ... ( 3  ) .. ............................हो दो दीवाने       ||


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