Saturday, 10 October 2015












दुनिया बनाने वाले, क्या तेरे मन में समाई
काहे को  दुनिया बनाई, तूने काहे को दुनिया बनाई  –

काहे बनाए तूने , माटी के पुतले
धरती ये प्यारी प्यारी  , मुखड़े ये उजले
काहे बनाया तूने ,  दुनिया का खेला
जिसमें लगाया , जवानी का मेला
गुप-चुप तमाशा देखे, वाह रे तेरी खुदाई

काहे को दुनिया बनाई, तूने काहे को दुनिया बनाई … !

दुनिया बनाने वाले, क्या तेरे मन में समाई , काहे को दुनिया बनाई
तूने काहे को दुनिया बनाई .

तू भी तो तड़पा होगा  , मन को बनाकर
तूफ़ां ये प्यार का  , मन में छुपाकर
कोई छवि तो होगी  , आँखों में तेरी
आँसू भी छलके होंगे ,  पलकों से तेरी
बोल क्या सूझी तुझको, काहे को प्रीत जगाई

काहे को दुनिया बनाई, तूने काहे को दुनिया बनाई … !

दुनिया बनाने वाले, क्या तेरे मन में समाई , काहे को दुनिया बनाई
तूने काहे को दुनिया बनाई .

प्रीत बनाके तूने जीना सिखाया, हंसना सिखाया , रोना सिखाया
जीवन के पथ पर मीत मिलाए
मीत मिलाके तूने सपने जगाए
सपने जगाके तूने, काहे को दे दी जुदाई

काहे को दुनिया बनाई, तूने काहे को दुनिया बनाई … !
दुनिया बनाने वाले, क्या तेरे मन में समाई , काहे को दुनिया बनाईतूने काहे को दुनिया बनाई   ...... ! ! ! 

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