Monday, 5 October 2015


चुपके चुपके रात दिन
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चुपके चुपके रात दिन , आँसू बहाना याद है
हम को अब तक आशिकी का , वो ज़माना याद है !

खैंच लेना ,वो मेरा परदे का कोना ,  दफ्फातन
और ,  दुपट्टे से तेरा , वो मुंह छुपाना याद है
तुझ से मिलते ही वो कुछ , बेबाक हो जाना मेरा
और तेरा दांतों में , वो उंगली दबाना याद है
चोरी-चोरी हम से तुम ,  कर मिले थे जिस जगह
मुद्दतें , गुजरीं पर , अब तक ,  वो ठिकाना याद है
दोपहर , की धूप में , मेरे बुलाने के लिए
वो तेरा , कोठे पे , नंगे पांव , 
आना याद है !
गैर की नज़रों से बचकर , सब की मर्ज़ी के ख़िलाफ़
वो तेरा , चोरी छिपे , रातों को , आना याद है
बेरुखी के साथ सुनना ,. दर्द--दिल की दास्तां
वो कलाई में , तेरा कंगन,  घुमाना याद है
वक्त--रुखसत , अलविदा का लफ्ज़ , कहने के लिए
वो तेरे ,  सूखे लबों का , थरथराना याद है
हम को अब तक आशिकी का , वो ज़माना याद है !
चुपके चुपके रात दिन , आँसू बहाना याद है ||







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