Saturday, 30 January 2016

एक था गुल और एक थी बुलबुल |

एक था गुल और एक थी बुलबुल   ,  एक था गुल और एक थी बुलबुल
दोनो चमन में रहते थे , है ये कहानी बिलकुल सच्ची , मेरे नाना कहते थे

एक था गुल और एक थी बुलबुल |










बुलबुल कुछ ऐसे गाती थी     ,   ऐसे गाती थीऐसे गाती थी
बुलबुल कुछ ऐसे गाती थी      ,   जैसे तुम बातें करती हो
वो गुल ऐसे शर्माता था       ,   ऐसे शर्माता थाऐसे शर्माता था
वो गुल ऐसे शर्माता था         ,   जैसे मैं घबरा जाता हूँ

बुलबुल को मालूम नही था     ,   गुल ऐसे क्यों शरमाता था
वो क्या जाने उसका नगमा   ,   गुल के दिल को धड़काता था
दिल के भेद ना आते लब पे    ,   ये दिल में ही रहते थे

एक था गुल और एक थी बुलबुल |

लेकिन आखिर दिल की बातें      ,   ऐसे कितने दिन छुपती हैं
ये वो कलियां है जो इक दिन      ,   बस काँटे बनके चुभती हैं
इक दिन जान लिया बुलबुल ने   ,   वो गुल उसका दीवाना है
तुमको पसन्द आया हो तो बोलूं   ,   फिर आगे जो अफ़साना है    ###

इक दूजे का हो जाने पर          ,    वो दोनो मजबूर हुए
उन दोनो के प्यार के किस्से     ,     गुलशन में मशहूर हुए
साथ जियेंगे साथ मरेंगे       ,     वो दोनो ये कहते थे  !

एक था गुल और एक थी बुलबुल |

फिर इक दिन की बात सुनाऊं       ,   इक सय्याद चमन में आया
ले गये वो बुलबुल को पकड़के       ,   और दीवाना गुल मुरझाया
और दीवाना गुल मुरझाया  !

शायर लोग बयां करते हैं            ,   ऐसे उनकी जुदाई की बातें
गाते थे ये गीत वो दोनो         ,   सैयां बिना नही कटती रातें         ,     सैयां बिना नही कटती रातें !
मस्त बहारों का मौसम था          ,    आँख से आंसू बहते थे ! ! !

एक था गुल और एक थी बुलबुल |

आती थी आवाज़ हमेशा          ,   ये झिलमिल झिलमिल तारों से
जिसका नाम मुहब्बत है वो           ,    कब रुकती है दीवारों से    !
इक दिन आह गुल--बुलबुल की   ,    उस पिंजरे से जा टकराई   !

टूटा पिंजरा , छूटा कैदी               ,   देता रहा , सय्याद दुहाई    !
रोक सके ना उसको मिलके        ,   सारा ज़माना , सारी खुदाई  !
गुल साजन को गीत सुनाने           ,   बुलबुल बाग में , वापस आए

याद सदा रखना ये कहानी           ,   चाहे जीना चाहे मरना
तुम भी किसी से प्यार करो तो      ,    प्यार गुल--बुलबुल सा करना .....(4 )




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